आज की दुनिया में मोबाइल फोन हमारी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बन गया है। सुबह की शुरुआत अलार्म से लेकर रात को सोने तक हम मोबाइल की स्क्रीन से चिपके रहते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आदत हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रही है? विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक मोबाइल उपयोग सिर्फ आंखों या गर्दन की समस्या नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक विकारों का भी कारण बन रहा है।
क्या कहते हैं डॉक्टर और विशेषज्ञ?
डॉक्टरों के अनुसार, “हर दिन 4-6 घंटे से अधिक समय मोबाइल स्क्रीन पर बिताना, विशेष रूप से सोशल मीडिया या गेम्स के लिए, मस्तिष्क में डोपामिन असंतुलन पैदा करता है। यह धीरे-धीरे तनाव, बेचैनी और अवसाद की ओर ले जाता है।”
मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से जुड़ी मानसिक समस्याएं:
डिजिटल एडिक्शन (Digital Addiction)
व्यक्ति बिना कारण बार-बार मोबाइल चेक करता है।
कुछ समय फोन दूर रखते ही बेचैनी होती है।
नींद के समय भी स्क्रीन पर रहने की आदत।
नींद में बाधा (Sleep Disturbance)
मोबाइल की ब्लू लाइट मेलाटोनिन (नींद हार्मोन) को दबा देती है।
देर रात तक स्क्रॉलिंग करने से दिमाग सक्रिय बना रहता है और गहरी नींद नहीं आती।
एकाग्रता में कमी (Lack of Focus)
लगातार नोटिफिकेशन से मानसिक ध्यान भंग होता है।
पढ़ाई, काम या घरेलू कार्य में मन नहीं लगता।
एंग्जायटी और डिप्रेशन
सोशल मीडिया पर दूसरों की ‘परफेक्ट’ जिंदगी देखने से तुलना की भावना जन्म लेती है।
इससे हीन भावना, अकेलापन और अवसाद पनपने लगता है।
सोशल आइसोलेशन (Social Isolation)
वास्तविक संबंध कमजोर होने लगते हैं।
व्यक्ति आभासी दुनिया में खो जाता है और परिवार/दोस्तों से दूरी बन जाती है।
तथ्यों की नजर से:
एक शोध के अनुसार, जो युवा प्रतिदिन 5 घंटे से अधिक मोबाइल चलाते हैं, उनमें डिप्रेशन के लक्षण सामान्य से 70 प्रतिशत अधिक पाए गए।
2024 में हुए एक वैश्विक सर्वे में 68 प्रतिश माता-पिता ने माना कि उनके बच्चों की मानसिक स्थिति पर मोबाइल का नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
कैसे करें मोबाइल के दुष्प्रभाव से बचाव?
– No Phone Zones तय करें, जैसे भोजन करते समय, सोते वक्त।
– मोबाइल के उपयोग के लिए समय सीमा तय करें (जैसे 2-3 घंटे प्रतिदिन)।
– पढ़ाई, वॉक, आउटडोर एक्टिविटी को दिनचर्या में शामिल करें।
– सोने से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल का उपयोग बंद करें।
– स्क्रीन टाइम ट्रैक करने वाले एप्स का सहारा लें (जैसे: Digital Wellbeing, Forest App)।