हम रोजमर्रा के भोजन में जिस गुड़ का स्वाद लेते हैं, वह सिर्फ मिठास नहीं बल्कि मेहनत और प्रकृति का अनमोल उपहार है। कभी चाय में, कभी तिल-गुड़ के लड्डू में और कभी सर्दियों की रोटी के साथ गुड़ हर रूप में हमारी थाली का हिस्सा रहा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह भूरा-सुनहरा गुड़ आखिर बनता कैसे है? आइए जानते हैं खेत से हांडी तक गुड़ बनने की पूरी रोचक प्रक्रिया।
गुड़ गन्ने के रस से बनने वाला एक प्राकृतिक मीठा पदार्थ है। इसमें किसी तरह का रसायन या कृत्रिम प्रक्रिया नहीं होती। यही कारण है कि गुड़ को देसी और स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है।
गुड़ बनाने की शुरुआत: गन्ने की खेती से
गुड़ बनाने के लिए सबसे पहले गन्ने की जरूरत होती है। गन्ने की फसल लगभग 10 से 12 महीनों में तैयार होती है। जब गन्ना पूरी तरह पक जाता है और उसमें भरपूर रस आ जाता है, तब उसे खेतों से काटा जाता है।
गन्ने से रस निकालना
कटे हुए गन्ने को कोल्हू या मशीन में डालकर उसका रस निकाला जाता है। यह रस हरे रंग का, मीठा और थोड़ा गाढ़ा होता है। इसी रस से आगे चलकर गुड़ बनता है।
रस को उबालने की प्रक्रिया
गन्ने के रस को बड़े-बड़े लोहे या कड़ाही में डाला जाता है। नीचे आग जलाकर रस को धीरे-धीरे उबाला जाता है। उबालने के दौरान रस में मौजूद अशुद्धियां ऊपर झाग के रूप में आ जाती हैं, जिन्हें लगातार हटाया जाता है।
शुद्धिकरण कैसे होता है?
रस को साफ करने के लिए पारंपरिक तरीकों से भिंडी, चुना या प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है। इससे रस साफ होता है और गुड़ का रंग बेहतर आता है। लगातार उबालने से रस गाढ़ा होता जाता है। जब यह सही गाढ़ापन पकड़ लेता है और रंग सुनहरा भूरा हो जाता है, तब आग बंद कर दी जाती है। यही अवस्था गुड़ बनने की सबसे अहम प्रक्रिया होती है।
सांचे में ढालना
तैयार गाढ़े रस को मिट्टी या धातु के सांचों में डाल दिया जाता है। ठंडा होने पर यह सख्त होकर गुड़ की टिकिया या डली का रूप ले लेता है।
गुड़ के प्रकार-
- ठोस गुड़
- पाउडर गुड़
- तरल गुड़ (शीरा) रंग और स्वाद गन्ने की किस्म और बनाने की विधि पर निर्भर करता है।
गुड़ क्यों माना जाता है बेहतर?
गुड़ में प्राकृतिक खनिज तत्व पाए जाते हैं। यह पाचन में मदद करता है और शरीर को ऊर्जा देता है। इसी कारण इसे चीनी से बेहतर विकल्प माना जाता है। गुड़ केवल एक मिठास नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत और हमारी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। आज भी गांवों में पारंपरिक तरीके से गुड़ बनाया जाता है, जो हमें प्रकृति से जुड़े रहने की सीख देता है। अगली बार जब आप गुड़ का एक टुकड़ा खाएं, तो याद रखें कि इसके पीछे खेतों की हरियाली, आग की तपन और इंसान की मेहनत छिपी है। गुड़ सचमुच मिठास से कहीं ज्यादा है सेहत, परंपरा और विज्ञान का सुंदर मेल है।