आसमान में हवाई जहाजों के पीछे बनने वाली सफेद लकीर का रहस्य

कैसे और क्यों बनती है आकृति, क्या कहता है विज्ञान?

by Real Voice News

 

जब भी हम खुले आसमान की ओर देखते हैं तो कई बार ऊंचाई पर उड़ते विमान के पीछे एक लंबी, चमकदार सफेद लकीर दिखाई देती है। यह लकीर कुछ समय तक स्थिर रहती है और फिर धीरे-धीरे फैलते हुए गायब हो जाती है। आम लोगों के मन में इसे लेकर कई सवाल उठते हैं क्या यह धुआं है, कोई रासायनिक गैस है या फिर कोई रहस्यमयी गतिविधि? आम बोलचाल में लोग इसे “धुआं” या “धुएं की लकीर” समझ लेते हैं, लेकिन वास्तव में इसका कारण पूरी तरह वैज्ञानिक और सरल है।

इस सफेद लकीर को क्या कहते हैं?

इस लकीर को कॉन्ट्रेल (Contrail – Condensation Trail) कहा जाता है।

यह शब्द Condensation (संघनन) और Trail (पगचिह्न) से मिलकर बना है।

यह लकीर बनती कैसे है?

जब कोई विमान लगभग 8 से 12 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ता है, तब वातावरण का तापमान -40°C से -60°C तक हो सकता है। विमान के इंजन से निकलने वाली गैसों में मुख्य रूप से: जलवाष्प (Water Vapour),कार्बन डाइऑक्साइड व कुछ अन्य गैसें शामिल होती हैं। जैसे ही ये गर्म गैसें अत्यधिक ठंडी हवा के संपर्क में आती हैं, तो उनमें मौजूद जलवाष्प तुरंत जमकर बर्फ के सूक्ष्म कणों में बदल जाती है। यही बर्फ के महीन कण मिलकर आसमान में सफेद लकीर का रूप लेते हैं।

क्या यह बादल जैसा ही होता है?

हां, बिल्कुल। असल में यह कृत्रिम बादल (Artificial Cloud) जैसा ही होता है। अंतर सिर्फ इतना है कि प्राकृतिक बादल सूर्य की गर्मी से बनते हैं जबकि यह बादल विमान के इंजन से निकली नमी से बनता है।

कभी लकीर जल्दी गायब क्यों हो जाती है?

यह वातावरण की नमी (Humidity) पर निर्भर करता है: कम नमी हो तो लकीर जल्दी गायब हो जाती है और ज्यादा नमी हो तो लकीर लंबे समय तक बनी रहती है और फैल भी सकती है। इसी कारण कभी-कभी आसमान में कई सफेद धारियां फैली हुई दिखती हैं।

क्या यह प्रदूषण या जहरीली गैस है?

नहीं। यह आमतौर पर कोई जहरीली गैस नहीं होती, बल्कि मुख्य रूप से जमी हुई जलवाष्प होती है। हालांकि, विमानों से निकलने वाली गैसें पर्यावरण पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती हैं, लेकिन जो सफेद लकीर हमें दिखती है वह स्वयं हानिकारक नहीं होती।

क्या यह मौसम को प्रभावित करती है?

वैज्ञानिकों के अनुसार: अत्यधिक हवाई यातायात वाले क्षेत्रों में ये लकीरें बादलों की तरह काम कर सकती हैं। इससे पृथ्वी की ऊष्मा संतुलन प्रक्रिया पर थोड़ा प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि यह प्रभाव बहुत सीमित और अस्थायी होता है। आसमान में उड़ते विमानों के पीछे दिखाई देने वाली सफेद लकीर कोई रहस्यमयी या खतरनाक चीज नहीं है, बल्कि यह विज्ञान का एक सामान्य और प्राकृतिक परिणाम है। यह दर्शाता है कि कैसे तापमान, नमी और ऊंचाई मिलकर हमारे आकाश में एक अद्भुत दृश्य रचते हैं।

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