हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय लोग करते हैं ये बड़ी गलती

by Real Voice News

छोटी सी लापरवाही से क्लेम हो सकता है रिजेक्ट

आज के समय में हेल्थ इंश्योरेंस हर परिवार की जरूरत बन चुका है। बढ़ती महंगाई और अस्पतालों में इलाज के लगातार बढ़ते खर्च को देखते हुए स्वास्थ्य बीमा आर्थिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण साधन माना जाता है। लेकिन कई लोग हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका नुकसान उन्हें बाद में क्लेम के समय उठाना पड़ सकता है।

सबसे बड़ी गलती अपनी मेडिकल हिस्ट्री छिपाना है। कई लोग यह सोचकर पुरानी बीमारी, सर्जरी या किसी स्वास्थ्य समस्या की जानकारी नहीं देते कि इससे प्रीमियम बढ़ सकता है या पॉलिसी मिलने में परेशानी होगी। लेकिन बीमा कंपनी के पास जांच के कई माध्यम होते हैं। यदि भविष्य में पता चलता है कि बीमाधारक ने सही जानकारी नहीं दी थी, तो क्लेम रिजेक्ट किया जा सकता है।

दूसरी आम गलती केवल कम प्रीमियम देखकर पॉलिसी खरीद लेना है। कम प्रीमियम वाली पॉलिसी में कई बार कवरेज सीमित होता है या महत्वपूर्ण सुविधाएं शामिल नहीं होतीं। इसलिए पॉलिसी खरीदने से पहले यह देखना जरूरी है कि उसमें कौन-कौन सी बीमारियां कवर हैं, वेटिंग पीरियड कितना है, रूम रेंट की क्या सीमा है और नेटवर्क अस्पताल कितने हैं।

कई लोग पॉलिसी दस्तावेज पढ़े बिना ही बीमा ले लेते हैं। बाद में जब उन्हें पता चलता है कि किसी विशेष बीमारी या उपचार का खर्च कवर नहीं है, तब निराशा होती है। इसलिए पॉलिसी की शर्तों और नियमों को ध्यान से पढ़ना बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार के लिए पर्याप्त कवरेज वाली पॉलिसी लेना भी आवश्यक है। आज के समय में बड़े शहरों में एक गंभीर बीमारी का इलाज लाखों रुपये तक पहुंच सकता है। ऐसे में बहुत कम सम इंश्योर्ड वाली पॉलिसी पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे पाती।

हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय ध्यान रखें
– मेडिकल हिस्ट्री की पूरी और सही जानकारी दें।
– पॉलिसी के नियम एवं शर्तें पढ़ें।
– नेटवर्क अस्पतालों की सूची जांचें।
– पर्याप्त कवरेज चुनें।
– केवल कम प्रीमियम के आधार पर निर्णय न लें।

हेल्थ इंश्योरेंस के सेक्टर में लंबे समय से काम कर रहे योगेश जैन कहते हैं सही जानकारी और सावधानी के साथ लिया गया हेल्थ इंश्योरेंस भविष्य में बड़ी आर्थिक परेशानियों से बचा सकता है। इसलिए पॉलिसी खरीदते समय जल्दबाजी करने के बजाय सभी पहलुओं को समझकर ही फैसला लेना चाहिए। इससे जरूरत पड़ने पर क्लेम मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है और परिवार को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा प्राप्त होती है।

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