सुहाग की लंबी उम्र, पति के अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल दांपत्य जीवन की कामना… करवा चौथ का त्योहार आते ही घर-घर में इसकी तैयारियां शुरू हो जाती हैं। सुहागिन महिलाएं पूरे दिन बिना अन्न और जल के व्रत रखती हैं और शाम को चांद के दर्शन के बाद पूजा करके व्रत खोलती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि करवा चौथ की पूजा में किन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है और इसकी पूजा किस तरह की जाती है?
क्या है करवा चौथ?
करवा चौथ हिंदू धर्म की प्रमुख परंपराओं में से एक है। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। इस पर्व में चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
कैसे करें करवा चौथ की पूजा?
सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की पूजा की जाती है।
शाम को करवा चौथ की पूजा के लिए करवा, रोली, अक्षत, फूल, दीपक, धूप, मिठाई और जल सहित आवश्यक पूजा सामग्री तैयार की जाती है। महिलाएं करवा चौथ की कथा सुनती हैं और माता पार्वती से अपने पति की लंबी उम्र तथा परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करती हैं।
चांद निकलने के बाद क्या करें?
रात में चंद्रमा के उदय होने पर महिलाएं छलनी से चंद्रमा के दर्शन करती हैं और उन्हें जल अर्पित करती हैं। इसके बाद पति का चेहरा छलनी से देखने की परंपरा है। पति के हाथों पानी पीकर व्रत खोला जाता है।
करवा चौथ पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की परंपराओं में कुछ अंतर हो सकता है।
जरूरी बात: करवा चौथ के दिन व्रत और पूजा का समय अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना बेहतर रहता है।
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